सुपात्र दान के महत्व के साथ वर्ष भर की आराधना में लगे दोषों के प्रमार्जन का पर्व – जिनेन्द्रमुनिजीसामूहिक पारणा महोत्सव में 130 से अधिक आराधक हुए शामिलभूमिका भास्कर संवाददाता थांदला / कसरावदअक्षय तृतीया के पावन दिन जैन श्वेतांबर समाज के वर्षीतप आराधकों के सामूहिक पारणें खरगौन जिलें के कसरावद तहसील में जैनाचार्य पूज्य गुरुदेव श्री उमेशमुनिजी म.सा. “अणु” के सुशिष्य धर्मदास गण नायक पूज्य प्रवर्तक जिनेन्द्रमुनिजी म.सा. आदि ठाणा 8 के पावन सानिध्य में सम्पन्न हुए। इस असवर पर समस्त तप आराधकों की वार्षिक तपस्या में लगे दोषों की आलोचना व प्रायश्चित विधि सम्पन्न करवाते हुए पूज्य गुरुदेव ने कहा कि वर्षी तप आराधक वर्ष भर सर्दी, गर्मी, बारिश में इच्छाओं का निरोध करते हुए सम भाव से तपस्या करते है वे विशेष कर्म निर्जरा करते है। अनेक जन एकासन तपस्वियों का उपहास करते है यह ठीक नही है क्योंकि शक्ति सामर्थ्य के अनुसार तप किया जाता है वही तप करने से ही तपस्या में निरन्तरता के भाव भी आते है। आज अनेक उदाहण है जो एकान्तर तप करते हुए निरन्तर तपस्या करने लगे है। इसलिए सबकों अपनी शक्ति के अनुसार उपवास, आयम्बिल, निवि, एकासन आदि विविध तप से वर्षीतप करना चाहिए। अणु वत्स पूज्य श्री संयतमुनिजी ने कहा कि प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेवजी से दिवस है। उनके अभिग्रह पूर्वक बेले तप में अंतराय आने से उनकी तपस्या वर्षभर चली व श्रेयांस कुमार के हाथों इक्ष्यु रस से भगवान का पारणा हुआ इस तरह आज का दिन तप प्रेरणा के साथ सुपात्र दान के प्रवर्तन का दिन है। उन्होनें कहा कि तप कर्म निर्जरा का हेतु है तो पारणा भी सहयोगी ही है। इसलिए तप से डरना नही चहिये अपितु हमने अनेक भवों में परवशता से क्षुदा वेदनीय कर्म को सहन किया है अब स्वयं तपस्या करके इच्छाओं का निरोध कर क्षुदा पर हमेशा के लिए विजय पाने के उद्देश्य से तपस्या करना चहिये। धर्म सभा में पूज्य श्री आदित्यमुनिजी ने भी सम्बोधित कर कहा कि जिन शासन पर निर्मल श्रद्धा हो तभी तपस्या के भाव बनते है। तप से शरीर व आत्मा दोनों की शुद्धि होती है वही तप के साथ संवर जुड़ता है तो आत्मा की विशेष शुद्धि होती है, इसलिए तपस्या शरीर की अपेक्षा आत्म लक्ष्य के लिए ही कि जाना चाहिए।धार्मिक आयोजन में सांसारिक आयोजन न हो“””””””””””इस अवसर पर गुरु भगवन्तों ने गुरुदेव के उपकारों का स्मरण कराते हुए कहा कि आज उनके ही संस्कार है कि स्कूल कॉलेज के बच्चें भी लघुवय में वर्षीतप जैसी दीर्घ आराधना करते आ रहे है। आज धार्मिक आयोजनों भी संसारिक कार्यक्रम जैसे हो गए है जो गलत रीति है इसलिए धार्मिक आयोजन में सांसारिकता नही आना चाहिए जिससे धार्मिकता के संस्कार सुरक्षित रहेंगे। इस अवसर पर गुरु भगवन्तों ने धार्मिकता के संस्कार सुरक्षित रहने के उद्देश्य को लेकर उपस्थित धर्म परिषद में रात्री भोजन, अब्राम्हश्चर्य सेवन तथा बड़े स्नान के प्रत्याख्यान भी करवायें।आयोजन में डूंगर क्षेत्र के आराधक हुए शामिल“””””””वर्षीतप पारणा महोत्सव में डूंगर, मालवा, निमाड़, गुजरात, राजस्थान के करीब140 आराधक शामिल हुए। जिसमें मेघनगर से तप चक्रेश्वरी स्नेहलता बहन वागरेचा, पंकज वागरेचा सहित 8 तपस्वी, थांदला से श्रीमती आशा श्रीमार, रवि लोढ़ा, पवन नाहर, विनोद श्रीमाल, झाबुआ, पेटलावद आदि स्थानों के तपस्वी भी शामिल हुए।खरगौन व कसरावद श्रीसंघ ने की मेजबानी – सैकड़ो आराधकों ने की धर्म प्रभावनाजैन श्वेतांबर श्रीसंघ खरगौन में विषम परिस्थितियों के कारण कसरावद में वर्षीतप पारणा महोत्सव का आयोजन किया गया जिसमें दोनों ही श्रीसंघ ने तपस्वियों को साता उपजाते हुए उनका बहुमान किया वही अनेक धर्म श्रद्धालुओं ने तपस्वियों को पारणा कराकर द्रव्य बहुमान कर पुण्यार्जन किया। वर्षीतप पारणा से पूर्व संध्या को सांकृतिक आयोजन के साथ तपस्वियों के लिए चौवीसी का आयोजन हुआ। समस्त आयोजनों में अखिल भारतीय चन्दना श्राविका संगठन, जैन जाग्रति मण्डल खरगौन, शांति महिला मंडल, त्रिशला बहु मण्डल कसरावद, नवयुवक मंडल खरगौन, कसरावद, इंदौर, करही, महेश्वर, मुदी, बडवाह सनावद, बलकवाड़ा, मंडलेश्वर, लिमडी, झाबुआ, थांदला, रतलाम आदि संघो ने सहयोग दिया। कार्यक्रम का संचालन खरगोन श्रीसंघ अध्यक्ष ललित खींवसरा व कसरावद नवयुवक मण्डल अध्यक्ष अमित कवाड़ ने किया व खरगौन सचिव खींवसरा ने आभार माना उक्त जानकारी थांदला श्रीसंघ के प्रवक्ता पवन नाहर ने दी।
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