श्री झूलेलाल चालीसा महोत्सव में लगाया गया 56 भोग।
प्रकाश राजपूत की रिपोर्ट
उमरिया ।
श्री झूलेलाल चालीसा महोत्सव पूज्य सिंधी पंचायत, नवयुवक सेवा मंडल, युवा सिंधु संगठन एवं समस्त सिंध समाज उमरिया द्वारा चालीसा महोत्सव प्रारंभ किया गया एवं आज दिनांक 17 जुलाई को अभिषेक पूजन आरती पल्लव अखंड ज्योति प्रज्वलित की गई थी जो कि 40 दिन भंडारा कर के समाप्ति की जाती है तथा आज 9 अगस्त को श्रद्धालुओं द्वारा श्री झूलेलाल साईं को 56 भोग लगाकर प्रसाद वितरण किया गया ।
झूलेलाल सिन्धी हिन्दुओं के उपास्य देव हैं जिन्हें ‘इष्ट देव’ कहा जाता है। उनके उपासक उन्हें वरुण (जल देवता) का अवतार मानते हैं। वरुण देव को सागर के देवता, सत्य के रक्षक और दिव्य दृष्टि वाले देवता के रूप में सिंधी समाज भी पूजता है।
उनका विश्वास है कि जल से सभी सुखों की प्राप्ति होती है और जल ही जीवन है। जल-ज्योति, वरुणावतार, झूलेलाल सिंधियों के ईष्ट देव हैं जिनके बागे दामन फैलाकर सिंधी यही मंगल कामना करते हैं कि सारे विश्व में सुख-शांति, अमन-चैन, कायम रहे और चारों दिशाओं में हरियाली और खुशहाली बने रहे।
भगवान झूलेलाल के अवतरण दिवस को सिंधी समाज चेटीचंड के रूप में मनाता है।कुछ विद्वानों के अनुसार सिंध का शासक मिरखशाह अपनी प्रजा पर अत्याचार करने लगा था जिसके कारण सिंधी समाज ने 40 दिनों तक कठिन जप, तप और साधना की। तब सिंधु नदी में से एक बहुत बड़े नर मत्स्य पर बैठे हुए भगवान झूलेलाल प्रकट हुए और कहा मैं 40 दिन बाद जन्म लेकर मिरखशाह के अत्याचारों से प्रजा को मुक्ति दिलाउंगा।
चैत्र माह की द्वितीया को एक बालक ने अरोड़वंशी ठक्कर परिवार में जन्म लिया जिसका नाम उडेरोलाल रखा गया। अपने चमत्कारों के कारण बाद में उन्हें झूलेलाल, लालसांई, के नाम से सिंधी समाज और ख्वाजा खिज्र जिन्दह पीर के नाम से मुसलमान भी पूजने लगे।
चेटीचंड के दिन श्रद्धालु बहिराणा साहिब बनाते हैं। शोभा यात्रा में ‘छेज’ (जो कि गुजरात के डांडिया की तरह लोकनृत्य होता है) के साथ झूलेलाल की महिमा के गीत गाते हैं। ताहिरी (मीठे चावल), छोले (उबले नमकीन चने) और शरबत का प्रसाद बांटा जाता है। शाम को बहिराणा साहिब का विसर्जन कर दिया जाता है।
भगवान झूलेलाल के प्रमुख संदेश संपादित करें
ईश्वर अल्लाह हिक आहे।
ईश्वर अल्लाह एक हैं।
कट्टरता छदे, नफरत, ऊंच-नीच एं छुआछूत जी दीवार तोड़े करे पहिंजे हिरदे में मेल-मिलाप, एकता, सहनशीलता एं भाईचारे जी जोत जगायो।
विकृत धर्माधता, घृणा, ऊंच-नीच और छुआछूत की दीवारे तोड़ो और अपने हृदय में मेल-मिलाप, एकता, सहिष्णुता, भाईचारा और धर्म निरपेक्षता के दीप जलाओ।
सभनि हद खुशहाली हुजे।
सब जगह खुशहाली हो।
सजी सृष्टि हिक आहे एं असां सभ हिक परिवार आहियू।
सारी सृष्टि एक है, हम सब एक परिवार हैं।
आज के कार्यक्रम में बंटी वाधवानी ,हरिराम सचदेव वासुदेव लालवानी, शंकर आहूजा अनिल खट्टर, दिपेश वाधवानी , प्रकाश गुरु महाराज ,दीपक, जितेंद्र परियानी,वाधवानी,महेंद्र हरवानी ,दीपक भागदेव ,प्रकाश राजपूत आदि उपस्थित थे ।
