बड़े हर्षोल्लास व धूमधाम से मनाया गया कजलियाँ पर्व।
जयसिंहनगर से राजकुमार यादव की रिपोर्ट
बघेलखण्ड में गायी जाती है कजरी गीत
हर साल रक्षाबंधन के दूसरे दिन मध्यप्रदेश में बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है कजलियाँ ।
हर जगह इसे भिन्न-भिन्न नामों से जाना जाता है जैसे बघेलखण्ड में इसे कजलियाँ व बुन्देलखण्ड में इसे भुँजरिया के नाम से भी जाना जाता है।
कजलियाँ प्रेम और भाईचारे का प्रतीक है।श्रावण शुक्ल सप्तमी के दिन कजलियाँ बोई जाती हैं जिसे रक्षाबंधन के दूसरे दिन तालाब या नदियों में विसर्जित कर कजलियाँ देते हैं। रिश्ते के अनुसार लोग आचरण करते हैं जैसे एक दूसरे के पाँव छूते,गले लगते या प्रणाम करते हैं ।खासकर बघेलखण्ड में इसका काफी महत्व है लोग कजलियाँ बोते हैं तथा पड़ोस की महिलाएँ मिलकर गीत गाया करती हैं जिसे कजरी कहते हैं ।
