मड़ावरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के हालात चिंताजनक।

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पत्रकार वाहिद खांन फैज़ल

भूमिका भास्कर तहसील मड़ावरा

मड़ावरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के हालात चिंताजनक

मोबाइल की टार्च के उजाले में कराऐ जा रहे हैं गर्भवती महिलाओं के प्रसव

मड़ावरा – जहां एक ओर उत्तर प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं पर कड़ोरो रुपए खर्च कर रही है। वहीं दूसरी ओर जनपद ललितपुर की तहसील मड़ावरा में बजट ना होने के चलते लाइट ना आने पर मोबाइल की रोशनी मे हो रहा है इलाज। जनपद ललितपुर का सबसे पिछड़ा इलाका मड़ावरा है, हालांकि कुछ बर्ष पहले तहसील का दर्जा मड़ावरा को दिया गया पर सुविधाएं एवं सुधार कुछ भी ना हो सका। कस्बा मड़ावरा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर प्रसव के लिए आई महिलाओं के जीवन के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। प्रसव केंद्र व इमरजेंसी वार्ड में इलाज मोबाइल के रोशनी में किया जा रहा है। कस्बा निवासी पं रामजी तिवारी का कहना है कि गुरुवार की रात वह स्वास्थ्य केंद्र पर अपना मरीज लेकर पहुंचे तब वहा पर इन्वर्टर की रोशनी में मरीजों का एलाज किया जा रहा था कुछ देर बाद इन्वर्टर बंद हो गया और करीब 1 घंटे से अधिक समय तक मरीजों को मोबाइल की रोशनी में प्रसव केन्द्र पर रहना पडा़। बहुत देर बाद बुलाने के बाद आए एक चिकित्सक का कहना था कि बजट ना होने के कारण जनरेटर नही चलाया जा सकता है। साथ ही बतौर चिकित्सक का कहना था जब बजट नही भेजा जाएगा तो क्या जेब से जनरेटर चलवाएंगे। आप लोग नेताओं से कहिए प्रशासन से कहिए कि बजट भिजवाएं, बिना बजट केसे जनरेटर चल सकेगा। जब उक्त संबध में चिकित्सा अधीक्षक से सम्पर्क करने की कोशिश की गई तो ना तो अधीक्षक साहब से सम्पर्क हो सका ना ही बुलाने पर वह अपने कमरे से बाहर आए | एक तरफ जहा प्रसव केंद्र पर मरीज मोबाइल की रोशनी में जूझ रहे थे वहीं स्वास्थ्य कर्मचारियों के घरो के इन्वर्टर मस्त चल रहे थे। और नींद का मजा लिया जा रहा था। स्थानीय लोगों का कहना है कि बहुत बार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की लापरवाहियों की शिकायत की जा चुकी है। पर हर बार खाना पूर्ति कर दी जाती है। ओर मरीजो की जान के साथ खिलवाड़ होता रहता है तो वहीं प्रसव के लिए आई महिलाओं को अंधेरे में जमीन पर सोना पडता है एवं उनके परिवारजन जो साथ में आए हों वह भी यहा वहां जमीन पर सोते हुए देखे जा सकते हैं। संबंधित बिभागीय अधिकारी अगर अचानक कभी रात्रि में निरीक्षण करते हैं तो वास्तविक स्थिति से रूबरू हो जाएंगे।

सबसे बड़ा सवाल क्या मजाक बनकर रह गई है सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था

जी हां इस कहावत को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मड़ावरा पर बिल्कुल बिना संदेह के बोला जा सकता है। क्योंकि जब ऐसी स्थिति सामने आती है और बार-बार विभागीय अधिकारियों को इससे रूबरू कराया जाता है। इसके बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। तो यह कहना लाजमी है कि सामुदायिक स्वास्थ्य मड़ावरा को मजाक बनाकर रख दिया गया है।

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