किन दो पूर्व अध्यक्षों पर गिरी गाज, जाने।
अपने क्षेत्र के विधायकों की शिकायतें पड़ी ताल की श्वेता व पिपलोदा के पटेल को महंगी
पितलिया 2 साल तो, श्याम बिहारी 5 साल नहीं लड़ सकेंगे कोई चुनाव
रतलाम(ब्यूरो)
शिरीष सकलेचा
रतलाम जिले की ताल नगर परिषद की तत्कालीन अध्यक्ष श्रीमती श्वेता बंटी पिपलिया 2 साल के लिए कोई चुनाव नहीं लड़ सकेगी तो वही पिपलोदा नगर परिषद के तत्कालीन अध्यक्ष व वर्तमान पार्षद श्याम बिहारी पटेल को 5 साल के लिए चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया है। इन दोनों मामलों में क्षेत्र के विधायकों द्वारा विधानसभा में विभिन्न विषयों को लेकर शिकायतें की गई थी। जिसके बाद कई शिकायतों में तो इन दोनों अध्यक्षों को क्लीन चिट मिल गई वहीं कुछ शिकायतों में यह दोषी पाए गए। जिसको लेकर नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा यह फैसले सुनाए गए।
ताल नगर परिषद अध्यक्ष के खिलाफ कांग्रेसी विधायक मनोज चावला ने विधानसभा में 19 बिंदुओं की शिकायतें की थी जिसमें दो बिंदुओं ने यह शिकायत सही पाई गई। श्वेता पिपलिया निर्माण सामग्री पुरानी दरों पर ही खरीदने के मामले में दोषी पाई गई जिसके लिए नगरीय विकास एवं आवास विभाग अपर सचिव भरत यादव ने एक आदेश जारी कर 1961 की धारा 36 क के तहत 2 साल के लिए उन्हें चुनाव लड़ने से वंचित करने के निर्देश दिए है।
वही पिपलोदा नगर परिषद के तत्कालीन अध्यक्ष श्याम बिहारी पटेल पर भी गाज गिरी है। यहां जावरा विधायक डॉ राजेन्द्र पांडे द्वारा पटेल के कार्यकाल की कई शिकायतें की गई थी जिसमें वह दुकान आवंटन मामले में दोषी पाए गए। उन्होंने निविदा विज्ञप्ति समाचार पत्रों में जारी करने में लापरवाही बरती थी जिसके चलते उन्हें 5 साल के लिए चुनाव लड़ने के योग्य नहीं माना गया एवं अयोग्य घोषित कर दिया गया।
बता दे श्याम बिहारी पटेल की पत्नी उपमा वर्तमान में अध्यक्ष है व पूर्व में भी अध्यक्ष रह चुकी है ।श्याम बिहारी पटेल भी 5 वर्ष तक अध्यक्ष रह चुके हैं। इस बार भी उन्होंने निर्दलीय पूरा पैनल उतारकर नगर परिषद चुनाव लड़ा था। जिसमें भारी सफलता उन्हें मिली एवं उनकी पत्नी अध्यक्ष पद पर काबिज हुई। श्याम बिहारी विधानसभा का चुनाव डॉ. पांडे के खिलाफ लड़ चुके हैं एवं 2023 में भी इनके पुनः विधानसभा चुनाव लड़ने की अटकलें थी। डॉ. पांडे व पटेल की राजनीतिक तकरार लंबे समय से चली आ रही है.। जो दोस्ती में नहीं बदल पाई ।फिर भी पटेल पांडे जैसे दिग्गज नेता से लोहा लेते हुए आगे बढ़ते गए।
ताल में श्वेता भाजपा समर्थित है वही विधायक विरोधी पार्टी के होने से उनकी शिकायतों को बल मिला। बताया जाता है कि ताल में भाजपा की गुटबाजी चरम पर है जिसके चलते कुछ गुट के लोग इस कार्यवाही से खुश नजर आ रहे हैं ।
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