अर्हम प्रिया जी ने क्या दी सीख ? जाने

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बच्चों को बचपन से ही संस्कार दो,नहो तो अंतिम संस्कार में भी नही आएंगे
—अर्हम प्रिया जी
बड़ावदा।शिरीष  सकलेचा
आज बच्चों को जहाँ  बचपन से ही संस्कार  देने की जरूरत है वही आजकल के माता पिता छोटे छोटे बच्चों को मोबाईल देकर उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे है। बच्चों को यदि संस्कार नही दिए तो  अंतिम संस्कार में भी शामिल  नही होंगे। हमे जिन शाशन  मिला है तो  लक्ष्य  क्या है यह भी तय करना है।
 उक्त प्रेरक प्रवचन साध्वीअर्हम  प्रिया श्री जी ने यहां जय शेखर धाम दादावाड़ी पर पर्यूषण पर्व के तीसरे दिन श्रावको को  अपने कर्तव्यों का बोध कराते हुए कहा। आपने कहा कि जैन श्रावक को शाशन प्रभावना के कार्य करना चाहिए। जिससे जिन शाशन की जाहोजलाली होगी।
  हर्ष प्रिया जी ने कहा कि  किसी की  हत्या का विचार  मन के लाना या करना पाप है तो आत्मह्त्या करना महापाप है। हमे मन मे किसी के प्रति इर्ष्या  के भाव नही रखना चाहिए। आपने कहा कि पाप का  प्रायश्चित करने के लिए साधु भक्तों से आलोचना लेना चाहिए। यह श्रावक का एक बड़ा कर्तव्य है।  मुक्ति प्रिया जी ने भी अपने विचार रखे।
     चतुर्मास समिति सचिव शिरीष  सकलेचा ने बताया कि धर्म सभा में नगर परिषद अध्यक्ष कल्पना कुमावत ने  मासक्षमण   की तपस्वी सुनीता मेहता व सिद्धि तप के 14 तपस्वियों का  शाल श्रीफल से बहुमान  किया। इस दौरान श्री राजेंद्र सुरी जैन दादावाड़ी ट्रस्ट की ओर से श्रीमती कुमावत का बहूमान भी किया गया। हर्ष प्रिया श्री जी ने श्रीमती कुमावत को प्रेरणा देते हुए कहा कि आपको सत्ता का पावर मिला है तो आम जनता के सुख दुख में सहभागी बनते हुए बड़ावदा नगर की सड़कों की दशा सुधारने की ओर भी कुछ काम करें। इस पर श्रीमती कुमावत ने शीघ्र सड़कों का पेच वर्क  करवाने का आश्वासन दिया।
   प्रभावना प्रो-सीएम मेहता (जावरा) ने वितरित की। शनिवार से कल्पसूत्र का वाचन प्रारम्भ होगा। जिसको बोहराने का लाभ श्रीमति  सम्प्पत बाई जुहारमल सकलेचा  परिवार ने लिया।  राजेन्द्र कुमार महेन्द्र कुमार ओरा के निवास पर शुक्रवार को प्रभु भक्ति का आयोजन होगा। उनके निवास पर भगवान की झांकी सजाई गई। शनिवार को उनके निवास से कल्पसूत्र(पोथा जी) का  चल समारोह निकलेगा। समापन जय शेखर धाम दादावाड़ी पर होगा।

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