अर्हम प्रिया जी ने ज्ञान पंचमी पर क्या दिया संदेश ? जाने

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ज्ञान पंचमी मन के अंधकार को मिटाकर ज्ञान का दीपक जलाने की प्रेरणा देती है— अर्हम  प्रिया श्रीजी

 

माहेश्वरी धर्मशाला में कल होंगे जीवन निर्माण की कला विषय पर जाहिर प्रवचन

बड़ावदा- शिरीष  सकलेचा

दीपावली   बाह्य अंधकार के  प्रकाश पर विजय प्राप्त करने का प्रदर्शन करती है जबकि ज्ञान पंचमी मन के अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश जलाने की प्रेरणा देती  है। ज्ञान व्यक्ति के भ्रम  को दूर कर  भव(संसार) से मुक्त करता है। ज्ञान के साथ व्यक्ति में विवेक का होना भी जरूरी है। ज्ञान की  अशातना (अवेहलना)से हमें बचना चाहिए नहीं तो अगले  भव में व्यक्ति को गूंगे ,बहरे ,अंधे, मंद बुद्धि वाला जीवन जीने को मजबुर होना पड़ता है। व्यक्ति को ज्ञान की निंदा करने व शिक्षक का तिरस्कार करने से बचना चाहिए।

ये प्रेरक प्रवचन बड़ावदा नगर गौरव साध्वी  अर्हम  प्रिया श्री जी ने जय शेखर धाम दादावाड़ी पर शनिवार को ज्ञान पंचमी के अवसर पर मौजूद धर्मालु जनों से कहे। साध्वी मुक्ति प्रियाश्री जी ने मंगलाचरण दिया।  अर्हम प्रिया श्री जी ने कहां की ज्ञान के बिना सब कुछ अधूरा है, लेकिन ज्ञान के साथ-साथ व्यक्ति में विवेक का होना बहुत जरूरी है ।यदि ज्ञान है और विवेक नहीं है तो वह ज्ञान कहीं-कहीं हंसी का पात्र भी बन जाता है। अतः व्यक्ति में विवेक का होना भी बहुत जरूरी है। आपने कहा कि जो ज्ञान की निंदा करता है अवहेलना करता है दूसरों को ज्ञान देने में कतरा था है उसे कई तरह की ज्ञान वर्णीय कर्मो के दोष  सहना पड़ते है। आपने कहा कि अध्यापक शिक्षक ग्रहस्थ  हैं फिर भी वे  ज्ञान के  उपकरण है, ज्ञान  के साधन हैं उनका तिरस्कार, उनका अपमान ,उनके ज्ञान की निंदा करना स्वयं  अपने लिए दुख के मार्ग को खोजने के बराबर है। आपने गुण मंजरी व वरद्दत  के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए ज्ञान की अवेहलना  करने के दुष्परिणामों का वर्णन किया तथा आपने धर्मालुजनों को प्रेरणा  दी  की ज्ञान  का कभी अपमान नहीं करें व अभिमान भी नहीं करें।

इस अवसर पर  मौजूद धर्मालुजनों ने विभिन्न ग्रंथों की  वासक्षेप से पूजा की। दोपहर में देव वंदन किया गया। प्रभावना महेंद्र ओरा ने वितरित की।

चातुर्मास समिति सचिव शिरीष सकलेचा ने बताया कि साध्वी हर्ष प्रिया श्रीजी के कल माहेश्वरी धर्मशाला में प्रातः 9.30 बजे से  *जीवन निर्माण की कला* विषय पर *जाहिर* प्रवचन होंगे ।कार्यक्रम के लाभार्थी श्रीमती भगवंता बाई मुंदड़ा परिवार  होंगे।  श्री संघ अध्यक्ष मानमल  सकलेचा ,राजेंद्र मूंदड़ा आदि ने आयोजन को सफल बनाने का अनुरोध किया है।

ज्ञान पंचमी मन के अंधकार को मिटाकर ज्ञान का दीपक जलाने की प्रेरणा देती है— अर्हम प्रिया श्रीजी

माहेश्वरी धर्मशाला में आज होंगे जीवन निर्माण की कला विषय पर जाहिर प्रवचन
बड़ावदा-दीपावली बाह्य अंधकार के प्रकाश पर विजय प्राप्त करने का प्रदर्शन करती है जबकि ज्ञान पंचमी मन के अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश जलाने की प्रेरणा देती है। ज्ञान व्यक्ति के भ्रम को दूर कर भव(संसार) से मुक्त करता है। ज्ञान के साथ व्यक्ति में विवेक का होना भी जरूरी है। ज्ञान की अशातना (अवेहलना)से हमें बचना चाहिए नहीं तो अगले भव में व्यक्ति को गूंगे ,बहरे ,अंधे, मंद बुद्धि वाला जीवन जीने को मजबुर होना पड़ता है। व्यक्ति को ज्ञान की निंदा करने व शिक्षक का तिरस्कार करने से बचना चाहिए।
ये प्रेरक प्रवचन बड़ावदा नगर गौरव साध्वी अर्हम प्रिया श्री जी ने जय शेखर धाम दादावाड़ी पर शनिवार को ज्ञान पंचमी के अवसर पर मौजूद धर्मालु जनों से कहे। साध्वी मुक्ति प्रियाश्री जी ने मंगलाचरण दिया। अर्हम प्रिया श्री जी ने कहां की ज्ञान के बिना सब कुछ अधूरा है, लेकिन ज्ञान के साथ-साथ व्यक्ति में विवेक का होना बहुत जरूरी है ।यदि ज्ञान है और विवेक नहीं है तो वह ज्ञान कहीं-कहीं हंसी का पात्र भी बन जाता है। अतः व्यक्ति में विवेक का होना भी बहुत जरूरी है। आपने कहा कि जो ज्ञान की निंदा करता है अवहेलना करता है दूसरों को ज्ञान देने में कतरा था है उसे कई तरह की ज्ञान वर्णीय कर्मो के दोष सहना पड़ते है। आपने कहा कि अध्यापक शिक्षक ग्रहस्थ हैं फिर भी वे ज्ञान के उपकरण है, ज्ञान के साधन हैं उनका तिरस्कार, उनका अपमान ,उनके ज्ञान की निंदा करना स्वयं अपने लिए दुख के मार्ग को खोजने के बराबर है। आपने गुण मंजरी व वरद्दत के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए ज्ञान की अवेहलना करने के दुष्परिणामों का वर्णन किया तथा आपने धर्मालुजनों को प्रेरणा दी की ज्ञान का कभी अपमान नहीं करें व अभिमान भी नहीं करें।
इस अवसर पर मौजूद धर्मालुजनों ने विभिन्न ग्रंथों की वासक्षेप से पूजा की। दोपहर में देव वंदन किया गया। प्रभावना महेंद्र ओरा ने वितरित की।
चातुर्मास समिति सचिव शिरीष सकलेचा ने बताया कि साध्वी हर्ष प्रिया श्रीजी के आज माहेश्वरी धर्मशाला में प्रातः 9.30 बजे से *जीवन निर्माण की कला* विषय पर *जाहिर* प्रवचन होंगे ।कार्यक्रम के लाभार्थी श्रीमती भगवंता बाई मुंदड़ा परिवार होंगे। श्री संघ अध्यक्ष मानमल सकलेचा ,राजेंद्र मूंदड़ा आदि ने आयोजन को सफल बनाने का अनुरोध किया है।

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