उनके आते ही आखिर क्यों मचा हड़कंप?

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 डिग्री के अनुरूप ही करो प्रेक्टिस , वरना होगी कड़ी कार्यवाही, बीएमओ की फटकार
बड़ावदा।शिरीष सकलेचा
जिले के रिंगनोद गांव में बंगाली डॉक्टर के हाथों 1 बच्चों की मौत के बाद रतलाम कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम के एक्शन मुड़  में आने के बाद जिले में प्रशासन की कार्यवाही झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ सतत चल रही है। जिला प्रशासन की ओर से स्वास्थ्य अधिकारी बड़ावदा भी सोमवार को  दोपहर में  आये। जैसे ही बीएमओ दीपक  पालड़िया, नायब तहसीलदार  राजेश श्रीमाल,  पटवारी पाटीदार एएसआई दीपक दीक्षित ,ओपी जाट, विवेक शर्मा व स्वास्थ्य विभाग के प्रमोद शर्मा व टीम के  नगर में आने की खबर मिली तो  कई  दवाखाने  बंद हो गए । बताया जाता है कि आधा दर्जन से अधिक डॉक्टरों के यहां बीएमओ ने पहुंच कर आवश्यक दस्तावेज व निर्धारित जानकारी हासिल की। बीएमओ  ने डॉक्टरों को हिदायत दी कि वे अपनी डिग्री के मुताबिक ही काम करें ,पंजीयन  आन लाइन करावे तब तक क्लिनिक बंद रखे अन्यथा उनके खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाएगी । बीएमओ ने कहा  खुद डॉ  इलाज करे, मरीज को किसी के भरोसे नही छोड़े।  उन्होंने मकान मालिकों को भी सूचित किया कि वह ऐसे डॉक्टरों को अपना मकान  किराए से ना दे  जो गैर कानूनी कार्य कर रहे हैं। बीएमओ ने बताया कि अभी कई  डॉक्टरों से जानकारी  ली है उन्हें हिदायत दी गई है कि वह अपनी डिग्री के अनुरूप ही कार्य करें अन्यथा उनके दवाखाने सील कर दिए जाएंगे।  बीएमओ ने बताया कि पुनः  जांच की जाएगी। प्रशासन  की कार्यवाही से  चिकित्सा क्षेत्र में हड़कंप मच  गया है। दवाखानों के बंद होने से मरीज भी परेशान होते नजर आए। हाल ही में खाद्य विभाग की टीम ने भी यहां किराना, होटलों ,ज्यूस सेंटर आदि दुकानों की  जांच पड़ताल की थी। उस समय भी दुकानें बंद हो गई थी ।उसके बाद  आज कई दवाखाने बंद हुए तो लोगों में फिर हैरानी हो गई।
   प्रशासन की कार्यवाही से छोटे डॉक्टरों में भय  का वातावरण बन गया है क्योंकि उन्हें डर है कि प्रशासनिक कार्यवाही कभी भी उन्हें अपने शिकंजे में कस सकती है?

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