बड़ावदा में हार के बाद भी किसे मिल रही हमदर्दी ?

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बड़ावदा में हार कर भी जीत गए भाजपा के अनिल अवस्थी,पराजय के बाद मिल रही हमदर्दी
बड़ावदा।शिरीष सकलेचा
नगर परिषद चुनाव में भाजपा से पार्षद पद के चुनाव के प्रबल दावेदार अनिल अवस्थी को टिकट नहीं मिलने के बाद वे निर्दलीय वार्ड क्रमांक 3 से पार्षद पद का चुनाव लड़े थे। जहां जनता ने उन्हें निर्वाचित घोषित करवा कर  नगर की जनता की सेवा का मौका दिया था ।जब अध्यक्ष पद के चुनाव की बारी आई तो अनिल अवस्थी अनारक्षित वर्ग से भाजपा कोटे से के प्रबल दावेदार थे लेकिन भाजपा के कुछ पार्षदों  व  पदाधिकारियों के विरोध के चलते अधिकृत प्रत्याशी के रूप में उनकी घोषणा लगभग हो चुकी थी लेकिन वक्त पर निरस्त हो गई ।इसके बाद अवस्थी को  उपाध्यक्ष पद के लिए भाजपा ने मैदान में उतारा ।चूंकि  जब यहां भाजपा अध्यक्ष 8  वोट  हासिल करके चुनाव जीत  गयी  तो यह तय था  कि उपाध्यक्ष पद में भाजपा के अनिल अवस्थी जीत जाएंगे लेकिन चुनाव परिणाम  ने अवस्थी को  पराजित  कर दिया। अवस्थी के पराजित  होने की खबर नगरवासियों व   भाजपा के पदाधिकारियों को पता चली तो मायूसी छा गई। उनकी हार के पीछे  क्रॉस वोटिंग  बताई जा रही है ।जिससे यहां भाजपा की रणनीति पर तरह-तरह की उंगलियां उठ रही है ।अवस्थी के सामने रशीद पठान 1 वोट से जीते। जिससे नगर की जनता को अवस्थी की यह हार गले नहीं उतरी। पठान के जुलूस में जिस तरह से उनका स्वागत हुआ,नारे बाजी हुई । एक वीडियो वाइरल हुआ   उसके बाद यहां भाजपा व नगर  में कई तरह की चर्चाएं चल रही है। जिससे यह कयास लगाए जा रहे हैं कि यहां भाजपा भाजपा को ही हराने में लगी रही और पूर्व विधायक जितेंद्र गेहलोत रणनीति पूरी तरह सफल नहीं हो सकी ।क्योंकि यदि  उपाध्यक्ष पद पर भाजपा जीतती  तो  निश्चित तौर पर गहलोत के कद  में और इजाफा होता ।अवस्थी की हार के बाद जहां जनता की हमदर्दी उन्हें मिल रही है वही गहलोत को  भी उनकी हार का मलाल सता रहा है । बताया जाता है कि अवस्थी की हार की समीक्षा कर   पूर्व विधायक  गहलोत एक एक चीज को समझ कर आगे की रणनीति तय करेंगे।
    कुलमिलाकर  इस चुनाव में भाजपा को जो  खुशी मिलना चाहिए थी वह नही मिली। विजय जुलूस में स्थानीय कई नेताओं, पार्षदो की दूरी साफ बता रही थी कि उनके मन की नही हुई। यहाँ देखा जाय तो अवस्थी खुद हारकर जीत गए तो उनके  दाएं हाथ राजेन्द्र कुमावत को  बड़ी सफलता दिलवाकर   अप्रत्यक्ष रूप से अपनी  इंट्री करवा ली है। अवस्थी ने दोस्ती  व पार्टी का फर्ज निभाते हुए अपनी अहमियत पार्टी व गेहलोत परिवार के बीच बड़ा ली है। बरहाल अभी तो जनता अवस्थी के साथ हुई  चीटिंग को बर्दाश्त नही कर पा रही है।

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