पर्यूषण पर्व के दौरान श्रावक के क्या होते हैं कर्तव्य ? जाने
- जीव दया ही सबसे बड़ा ध्रर्म होता है-हर्ष प्रिया श्री जी
।बड़ावदा-शिरीष सकलेच
भगवान महावीर स्वामी ने हमें जियो और जीने दो का संदेश दिया है। पर्यूषण पर्व के दौरान हमें किसी जीव की हिंसा ना हो इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए क्योंकि जब हम किसी को जीवनदान नहीं दे सकते तो हमें उसे मृत्यु देने का भी अधिकार नहीं है। भगवान महावीर का संदेश इसी बात को इंगित करता है।
उक्क्त प्रवचन यहाँ पर्युषण पर्व के प्रथम दिवस बुधवार को साध्वी हर्ष प्रिया श्री जी म सा ने मौजूद धर्मालुजनो के समक्ष दिए।
आपने पर्युषण पर्व के दौरान श्रावको के पाँच कर्तव्य अमारीव परिवर्तन,साधर्मिक भक्ति, क्षमापना,अठम तप,चैत्य परिपाटी का विस्तार से वर्णन करते हुए हर कर्तव्य की महत्वता बताई।
मुक्ति प्रिया श्री जी ने कहा कि पर्युषण पर्व मनाना तभी सार्थक सिद्ध होगा जब हम संपूर्ण दिवस में त्याग तपस्या धर्मआराधना करते हुए प्राणी मात्र के प्रति दया के भाव रखेंगे।
अर्हम प्रिया श्री जी ने कहा कि बड़ावदा में जैन समाज पर्यूषण पर्व के दौरान अपने प्रतिष्ठान पूरी धरा बंद रखता है जिससे यह लगता है कि यहां का समाज पर्युषण पर्व को लेकर कितना उत्साहित है लेकिन इस उत्साह को हमें धर्म आराधना के साथ आगे बढ़ाना है।
चातुर्मास समिति सचिव शिरीष सकलेचा ने बताया कि प्रवचन के पश्चात जय शेखर धाम दादावाड़ी से एक चैत्य परिपाटी नगर के प्रमुख मार्गों से निकाली गई श्री आदिनाथ जैन मंदिर में चैत्य वंदन हुआ। प्रभावना प्रदीप बाफना की और से वितरित की गई।
पर्यूषण पर्व को लेकर यहां जैन समाज में अपार उत्साह देखा जा रहा है। श्री आदिनाथ जैन मंदिर व जय शेखर धाम दादावाड़ी पर प्रातः से समाजजन पूजा अर्चना दर्शन हेतु पहुँच रहे थे। भगवान की मनमोहक अंग रचना की गई। दोपहर में धार्मिक अंताक्षरी प्रतियोगिता आयोजित की गई ।रात्रि में महा आरती व प्रभु भक्ति के आयोजन भी हो रहे हैं।
चल रहा है तपस्याओं का दौर—-
यहां चातुर्मास प्रारंभ से ही जैन समाज में तपस्याओ का ठाठ लगा हुआ है। 14 तपस्वी सिद्धि तप की तप आराधना कर रहे हैं। पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष श्रीमती सुनीता प्रदीप मेहता ने 21 उपवास के प्रत्यक्षा लिए। शिरीष सकलेचा ने बताया कि 26 अगस्त से सामूहिक अठाई (आठ उपवास)की तपस्या प्रारंभ होगी।
