जैव विविधता पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का हुआ आयोजन।

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जैव विविधता पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित

रीवा । मध्यप्रदेश उच्च शिक्षा गुणवत्ता उन्नयन के अंतर्गत शासकीय शहीद केदारनाथ महाविद्यालय मऊगंज जिला रीवा (मध्य प्रदेश) में भूगोल एवं वनस्पति विज्ञान के संयुक्त तत्वावधान में “भारत में जैव विविधता की गतिशीलता एवं उसका संरक्षण: चुनौतियां एवं संभावनाएं” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के द्वितीय दिवस के प्रथम सत्र के विशिष्ट अतिथि अनिरुद्ध कुमार, एसोसिएट प्रोफेसर, केंद्रीय जनजाति विश्वविद्यालय, अमरकंटक, (मध्यप्रदेश) एवम डॉ प्रमोद कुमार, असिस्टेंट प्रोफेसर, केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश ) रहे।
कार्यक्रम के द्वितीय दिवस के प्रथम सत्र का शुभारंभ सरस्वती मां की प्रतिमा पर दीप प्रज्वलन एवं सभी अतिथियों का माल्यार्पण से स्वागत कर प्रारंभ किया गया। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आलोक कुमार राय महाविद्यालय में पधारे सभी अतिथियों का स्वागत किया। इस कार्यक्रम के संयोजक डॉ. प्रकाश चंद्र पटेल, सचिव डॉ. अनवर खान, सह- संयोजक डॉ. एन. डी.त्रिपाठी रहे।
कार्यक्रम के विशिष्ट वक्ता डॉ. अनिरुद्ध कुमार ने कहा कि.. भारत में जैव विविधता की गतिशीलता एवं संरक्षण की बहुत जरूरत है। यदि हम जैव विविधता का संरक्षण नहीं किए तो आए दिन हमें अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा और हमारे वातावरण में धीरे-धीरे प्रदूषण बढ़ता जाएगा जिससे मानव का जीवन दूभर हो जाएगा।
अगले वक्ता डॉ प्रमोद कुमार ने कहा कि… आज हमारा पर्यावरण बहुत प्रदूषित होता चला जा रहा है। हमारे इस पृथ्वी से छोटे छोटे जीव और सूक्ष्म प्रजातियां खत्म होती चली जा रही हैं। जिसका जिम्मेदार आज का मनुष्य है। वह अपनी चाहत में अनेक प्रकार के भौतिक संसाधनों का उपयोग करता है जिसके कारण उसका प्रभाव हमारे जैव विविधता पर पड़ता है। जैव विविधता को संरक्षण करना है तो वातावरण को प्रदूषण से बचाना होगा।
द्वितीय तकनीकी सत्र के विशिष्ट वक्ता डॉ.बी.पी. सिंह, प्राध्यापक भूगोल, टीआरएस महाविद्यालय, रीवा (मध्यप्रदेश), डॉ. बी.के. शर्मा, प्राध्यापक भूगोल, टीआरएस महाविद्यालय रीवा (मध्यप्रदेश)रहे।
विशिष्ट वक्ता डॉ. वी. पी. सिंह ने कहा कि.. मध्यप्रदेश में जैव विविधता एवं पर्यटन को वर्तमान समय में बढ़ाने की आवश्यकता है। जब मानव प्रौद्योगिकीकरण की ओर बढ़ेगा तो जैव विविधता संकट में होगा। वर्तमान समय में जीवों एवं वनस्पतियों की विविध प्रजातियां दिन प्रतिदिन समाप्त होती चली जा रही है। विश्व के लिए यह चिंता का विषय है। इसलिए हम सब को मिलकर जैव विविधता के संरक्षण का दायित्व उठाना चाहिए।
अगले विशिष्ट वक्ता डॉ. वी. के. शर्मा ने कहा कि… आधुनिकता की चकाचौंध ने हमारे जैव विविधता पर सेंध लगाने का काम किया है। जैसे जैसे हम विकास की ओर बढ़ते चले जाते हैं वैसे वैसे हम जैव विविधता का दोहन करते चले जा रहे हैं। आज हमें जैव विविधता के संरक्षण की आवश्यकता है इसके लिए हमें सचेत होना होगा।
इस राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी के समापन सत्र के मुख्य अतिथि मऊगंज विधानसभा के विधायक आदरणीय प्रदीप पटेल, विशिष्ट अतिथि श्री महेश चंद्र रालही, अध्यक्ष जनभागीदारी , विशिष्ट वक्ता डॉ. आर. पी. अनुरागी, असिस्टेंट प्रोफेसर, केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर (मध्यप्रदेश) रहे।
विशिष्ट वक्ता डॉ. आर. पी.अनुरागी ने कहा कि… वर्तमान परिदृश्य में वनस्पतियां एवं जीवो को विलुप्त होते देखा जा रहा है। इसका कारण वातावरण का प्रदूषण है। आज हमें जैव विविधता के प्रति सचेत होना होगा और हमें ज्यादा से ज्यादा वृक्षों को लगाना होगा। जिससे हमारा पर्यावरण भी अच्छा रहे और मानव जीवन भी।
विशिष्ट अतिथि श्री प्रदीप पटेल ने कहा कि…हमे अपने वातावरण के प्रति सजक रहना होगा। पेड़ पौधों को ज्यादा से ज्यादा लगाना होगा। हम अपने रोजमर्रा के दिनों में परिवर्तन करके जैव विविधता का संरक्षण कर सकते है। आज हमारे पास जल संरक्षण की भी जरूरत है। यदि हम जीव जंतु पेड़ पौधों को नहीं बचाएंगे तो जैव विविधता संकट के कगार पर होगा। साथ ही साथ सामाजिक संस्कृतियों को बचाना बहुत जरूरी है।
इस कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. एस. एन. पांडेय एवम आभार डॉ. एन.डी.त्रिपाठी ने किया। इस राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी में महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. बी आर. मौर्य, डॉ. पी. के. पी. त्रिपाठी, डॉ. प्रमोद गुप्ता डॉ. आर. एन पटेल, डॉ.दिनेश पटेल, डॉ प्रदीप विश्वकर्मा, डॉ. रामायण पटेल, श्री सूजन सिंह, डॉ. सुखेंद्र चौधरी, डॉ.अंकुल पांडेय, डॉ.प्रतिभा सिंह, डॉ. रविशंकर द्विवेदी, डॉ. सुनीता द्विवेदी, डॉ. नीता मिश्रा, डॉ. आशीष बृज, डॉ. अजय सिंह गहरवार, डॉ. अवनीश सिंह, श्री प्रकाश पांडेय एवं प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक, अतिथि विद्वान, शोधार्थी एवम अनेक छात्र/ छात्राएं इस राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी में उपस्थित रहे।

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