गौरझामर में आदिवासीयो के घरों में खाने के पड़े लाले ,आदिवासी बोले- चार दिन का राशन देकर भूल गया प्रशासन

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गिरीश शर्मा गौरझामर

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गिरीश शर्मा गौरझामर

गिरीश शर्मा गौरझामर – कोरोना वायरस जैसी महामारी व लॉकडाउन के बीच उन लोगों की मुसीबतें सबसे ज्यादा बढ़ गई हैं जो आदिवासी सिर्फ मजदूरी पर ही निर्भर है और मजदूरी कर पेट पालते हैं। ऐसा ही मामला गौरझामर क्षेत्र के गंंगवार शालावारा, बरकोटी, खमखेडा में सामने आया है। गरीब आदिवासी परिवार सिर्फ दो टाइम की रोटी के लिए यह दिनभर मजदूरी करते हैं। लॉकडाउन के बीच में ऐसे कई परिवार हैं, जिन्हें भरपेट खाना मिलना तक मुश्किल हो गया है। 60 फीसदी लोगो मजदूरी पर निर्भर है। ऐसे में लॉक डाउन के चलते गौरझामर क्षेत्र के आदिवासी परिवार अब बेरोजगार हो चुके हैं और घरों में खाने के लाले पड़े चुके हैं। समाजसेवी संगठनों व प्रशासन के माध्यम से राशन भेजा जा रहा है, लेकिन हर एक तक यह राशन नहीं पहुंच पा रहा है। लॉकडाउन के बीच 17 मई तक गरीबों की मुसीबत बढ़ा गई । कर्फ्यू के बीच घरों में आटा, दाल, तेल या अन्य खाद्य सामग्री खत्म होने से गरीब परिवारों को अब मुसीबतें झेलने पड़ रहे हैं

टीकाराम आदिवासी ने कहा – राशन देकर भूल गया प्रशासन…
गांव में एक या दो नहीं बल्कि कई ऐसे परिवार हैं, जिनके पास राशन कार्ड नहीं है। इसी के चलते उन्हें राशन का वितरण भी नहीं हुआ। अब यह लोग प्रशासन और समाजसेवियों के आने का इंतजार कर रहे हैं। कुछ दिन पहले उन्हें प्रशासन व समाजसेवियों के जरिए थोड़ा राशन दिया था, लेकिन वह खत्म हो चुका है। ऐसे में वह कर्फ्यू के कारण काम भी नहीं मिल रहा है

पुन्नीलाल आदिवासी ने कहा कि यहां तो प्रशासन ने अब तक गांवों में कोई खैर खबर ही नहीं ली है। पहले राशन देकर वह तो उन्हें भूल ही गया, अब वह क्या खाएंगे। बंद के कारण कुछ भी नहीं मिल रहा है।

कल्लू आदिवासी ने कहा की लॉक डाउन में काम भी नहीं मिल रहा है ऐसा ही माहौल रहा तो में और बच्चे भी भूखे मर जाएंगे आदिवासी परिवार आज भी रुखी रोटी खाकर अपने और बच्चों का पेट भरा।.

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